नाम:एच-एस-अरमो "अरमान "
जिला:रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: भूख ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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।।। भूख ।।।
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सब जीवों का जीना---
भोजन बिना अधूरा हैं,
जब लगती भूख जीवों को,
भटकते रहते हैं, भोजन के लिए ।01।
पेड़-पौधों की मिटती भूख--
सूर्य प्रकाश में, बनाते,
जब वे अपना भोजन,
प्रकाश संश्लेषण की होती क्रिया।02।
जल जीवों को मिले भोजन--
शैवालों व सहजीवों से,
इनकी भूख, कभी खत्म नहीं होती,
जल पारिस्थितिक तंत्र को अपनाए।3
संसार में, होते हैं, कई तरह के लोग--
किसी को होती है, धन-दौलत की-- भूख और किसी को नशे की भूख,
भूख जीवन का अभिन्न अंग है,
भूख है तो, जीने की चाहत है।04।
ईश्वरीय आराधना की भूख--
करते हैं, भजन-पूजन व प्रार्थना,
मूर्ति का जलाभिषेक ,हैं करते,
तीर्थस्थल हैं जाते,चारों धाम यात्रा,
करते, प्रभु भक्ति में होते लवलीन।5।
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***स्वरचित-प्रस्तुतीकरण ***
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