Wednesday, December 28, 2022

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- आग के रूप अनेक

रचनाकार-गोमती सिंह 
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-आग 
विधा-छंदमुक्त कविता 
शीर्षक-"आग के रूप अनेक "

संपर्क नंबर-8103564763
हे अग्नि देवता! करूँ मैं तेरा वंदन!
तेरे कितने रूप हैं करूँ कैसे इसका वर्णन। 

पंचतत्व से बने मानव तन में 
एक तत्व है  आग भी होता ।

देहरी पर दीप तुमसे है जलता 
श्री हरि के मंदिर में पूजन होता 

हवन कुण्ड में प्रज्वलित होने से ,
वायुमंडल को  शुद्ध है करता ।

भोजन बनता पोषण पाता ,
मानव जीवन का तुमसे गहरा नाता। 

जठराग्नि प्रज्वलित न होंने से,
मनुष्य का शरीर रुग्ण हो जाता। 

देह त्याग करती जब आत्मा,
आग ही उसे सद्गति है देता ।
           ।।इति।।
    -गोमती सिंह 
कोरबा,छत्तीसगढ़

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