Tuesday, December 6, 2022

ओड़िसा,सुंदरगढ़ से मोनालिसा बेहरा की रचना- अब शहर तेरा

रचियता- मोनालिसा बेहरा
पता- सुंदरगढ़ ओड़िसा
विषय - शहर
शीर्षक- अब शहर तेरा...
संपर्क - 7008917507

अब कभी शहर तेरा ,मेरा शहर ना होगा
ना मेरी गलियों में तेरे आने का आहट होगा।

एक लंबा रास्ता है ,अब हमारे दरमियाँ
ना तुझसे ना मुझसे,अब ये तय होगा।

अब भी झोंके यादों की ,दस्तख़त देती हैं
चेहरे का वो नूर अब हमसे बयाँ ना होगा।

माना हसरतों की उम्र ना देखी जाती है
पर यकीं है तू अब भी तड़पता तो होगा।

रूह का रूह से अब भी एक खास रिश्ता है
भले लाख तू अपने दिल को समझता होगा।

खामोश रातों में करवट बदल बदल कर
उम्मीदों का दिया बुझा,तू अब भी जागता होगा।

सूखे अश्कों वाली आंखों से नींदों को खोकर
अब तू भी मेरी ही तरह छटपटाता तो होगा।।

                              स्वरचित -मोनालिसा'असीम'

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