Tuesday, December 6, 2022

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- शहर

रचयिता-उर्मिला सिदार
जिला-रायगढ
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-पद्य
शीर्षक-शहर
संम्पर्क-9303298994
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 गाँवों की स्वरूप अब,
शहरों में तबदील हो रही है।
ग्रामों की रौनक आहिस्ता से
धुमिल हो रही है।

शहरों की कोलाहल से ,
मन उबने लगा है।
चिड़चिड़ापन मानसिकता,
लोगों में पनपने लगा है।

चिड़ियों की मधुर आवाज,
अब लुप्त होने लगे है।
शहरों की चकाचौंध से,
जीव- जन्तु डरने लगे है।

शहरों की पहनावा परम्परा,
गाँव गली में दिख रहे है।
चकाचौंध से आकर्षित ग्रामीण,
शहर पलायन कर रहे है।

शहरों की अव्यवस्था, अब
गाँवों में दिखने लगे है।
गाय बैलो को खदेड़ कर ,
अब कुत्ता पालने लगे है।

शहरों की सुख सुविधाएं,
अब गावों में दिख रहें है।
शुद्ध हवा प्रदुषित हो गई
औद्योगिक धुआंँ पी रहें है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ छत्तीसगढ़

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