कवि -- चेतन सिंह
पता -- कसडोल छत्तीसगढ़
विषय -- शहर
शीर्षक - मेरे शहर का
संपर्क -9202507146
मत पूछ कैसा है मिज़ाज , मेरे शहर का !
बेशक है जिंदादिल अंदाज़ , मेरे शहर का !
हर राही ठिठक जाये , सुनकर सदा इसकी ,
इतना मधुर है आवाज़ , मेरे शहर का !
कैसे बयां करूं मैं , इसकी मासूमियत को ,
मनभावन , मनमोहक है साज , मेरे शहर का !
'कुश' की नगरी ये , कहते हैं 'कसडोल' इसे ,
सारा जग करती है लिहाज़ , मेरे शहर का !
छूने को बेकरार , तरक्की के आसमां को ,
बहुत , बहुत ऊंची है परवाज़ , मेरे शहर का !
भांति -भांति के लोग रहते हैं , मेरे शहर में ,
प्रेम , समर्पण का है रिवाज़ , मेरे शहर का !
शहर के मुहाने पर बहती है मीठी जलधारा ,
जीवनदायिनी महानदी है लाज , मेरे शहर का !
खेतों को सींचती बलार जलाशय है देन जिनकी,
डां.कन्हैयालाल शर्मा हुए हैं सरताज , मेरे शहर का !
सामु.स्वास्थ्य केंद्र को मिला नाम अमर शहीद का ,
" संतराम साहू " है जांबाज़ , मेरे शहर का !
जिसके दरबार में गूंजती है जयकारे सदा ,
मां महामाया मंदिर है ताज , मेरे शहर का !
भोलेबाबा बन करते हैं, मनोरंजन सभी का ,
दाऊदास मानिकपुरी है नाज़ , मेरे शहर का !
रामसगरा , कपूरताल है वर्षों से पहचान इसकी ,
बड़ा प्रसिद्ध है खजरी तालाब , मेरे शहर का !
पैराडाइज पैलेस में लगते हैं , पर्यटकों के मेले ,
लगता है ये होटल ताज , मेरे शहर का !
जानीचाट ,संजूरोल,पुनीपान के है दीवानें कई,
कोई शख्स नहीं इनसे नाराज़ , मेरे शहर का !
दर्द का तनिक भी अहसास न होने दे कभी ,
ऐसा है सुघ्घर इलाज़ , मेरे शहर का !
"'लबरा-गुड़ी" में , होती है कई दौर की वार्ताएं ,
बनता है यहां रोज नया स्वराज , मेरे शहर का !
बड़े शहरों की चकाचौंध से कहीं बहुत दूर ,
अपना अलग ही है अंदाज़, मेरे शहर का !
वाणी में रस घोलती , है फिज़ां यहां की ,
बड़ा दिलकश है अल्फाज़ , मेरे शहर का !
कहते हैं 'कसडोलिहा ' यहां के शिशु को भी,
हर बंदे को है इस पर नाज़ , मेरे शहर का !
अपना कसडोल,सुंदर कसडोल चाहत सबकी ,
यक़ीनन इक दिनआएगा सुराज , मेरे शहर का!
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