Saturday, November 5, 2022

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से चेतन सिंह की रचना- मैं और मेरी परछाई

कवि -- चेतन सिंह
 *पता - कसडोल , बलौदाबाजार
राज्य* - छत्तीसगढ़
विषय - परछाई
शीर्षक - मैं और मेरी परछाई
संपर्क -- 9202507146
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साथ -  साथ वो  मेरे  घर  से बाहर निकलती है !
कदम - से - कदम  मिलाकर  वो संग चलती है !
जब  अंधेरा हो , तो  वो  गुम - सी  हो  जाती है ;
मुझमें  जीती , मुझमें मरती , मुझी  में पलती है !

अंधेरा  न   उसको   भाता   कोई !
उजालों  से उसका  है नाता कोई !
शायद है अमरता का वरदान उसे ,
अस्त्र  न उसको  मार पाता कोई !
कभी चींटी सी, कभी खंभे सी वो रूप बदलती है !
मुझमें जीती ..............................................

न  बर्फ  में  वो  पिघलती  है !
न   आग  में   वो  जलती  है !
तूफानों   से  न   डर  उसको ,
लहरों   में    वो   टहलती  है !
कूदती - फुदकती  रहती , वो हर पल मचलती है !
मुझमें जीती ..............................................

हम दोनों दो जिस्म एक जां बराबर !
मेरा तन  ही  है उसका अपना  घर !
मुझसे  बिछड़ कर  वो  रह  न पाए , 
वो मेरी परछाई , वो मेरा  हमसफ़र !
सूर्य संग उदय  उसका , सूर्य संग  ही  ढलती  है !
मुझमें जीती..............................................




 

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