Saturday, November 5, 2022

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- माँ मैं तेरी परछाई हूँ

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- परछाई 
शीर्षक- माँ मैं तेरी परछाई हूँ
संपर्क- 7974389033

माँ  मैं  तेरी परछाई  हूँ;
मै तुझसे ही तो आई हूँ।
आज हालातों को देखकर;
मैं  थोड़ी  सी  घबराई  हूँ।1।

आज मै खुद से परेशान हूँ;
तेरे हौसलों की पहचान हूँ।
माँ मैं बहुत छोटी नादान हूँ;
दुनिया के लोगों से अंजान हूँ।2।

माँ खुद भूखी रहकर;
बच्चों को खिलाती है।
माँ  रातभर  जगकर;
बच्चों को सुलाती है।3।

माँ सारे दुख दर्द सहकर;
बच्चों  को  सुख  देती  है।
बच्चों को पढ़ा-लिखाकर;
आदर्श  जीवन  देती  है।4।

स्वाभिमान मैं तुझसे पाई हूँ;
संस्कार मैं तुझसे पाई हूँ।
तुझमें  मैं  खुद  समाई हूँ;
माँ  मैं  तेरी  परछाई  हूँ।

    *परमानंद निषाद'प्रिय'*
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com

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