कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- परछाई
शीर्षक- माँ मैं तेरी परछाई हूँ
संपर्क- 7974389033
माँ मैं तेरी परछाई हूँ;
मै तुझसे ही तो आई हूँ।
आज हालातों को देखकर;
मैं थोड़ी सी घबराई हूँ।1।
आज मै खुद से परेशान हूँ;
तेरे हौसलों की पहचान हूँ।
माँ मैं बहुत छोटी नादान हूँ;
दुनिया के लोगों से अंजान हूँ।2।
माँ खुद भूखी रहकर;
बच्चों को खिलाती है।
माँ रातभर जगकर;
बच्चों को सुलाती है।3।
माँ सारे दुख दर्द सहकर;
बच्चों को सुख देती है।
बच्चों को पढ़ा-लिखाकर;
आदर्श जीवन देती है।4।
स्वाभिमान मैं तुझसे पाई हूँ;
संस्कार मैं तुझसे पाई हूँ।
तुझमें मैं खुद समाई हूँ;
माँ मैं तेरी परछाई हूँ।
*परमानंद निषाद'प्रिय'*
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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