Sunday, November 13, 2022

बिलासपुर से सावित्री यादव 'सावि' की रचना- गुरू

कवियत्री  का  नाम -सावित्री यादव  "सावि "
राज्य -छ. ग. 
जिला -बिलासपुर  
शीर्षक -गुरु 
विधा - पद्य 
सम्पर्क  न. -7566685373

गुरु ही प्रथम  पूज्य  ऐसा ईश्वर  ने समझाया । 
गुरु ने ही  शिष्य  के जीवन   को महकाया। 

गुरु के ज्ञान  रूपी  छाँव मे ही शिष्य  ने आराम  पाया।  अज्ञानता  को  गुरु ने ही अपने ज्ञान  से  दूर भगाया। 

वर्ण से लेकर अक्षर तक कल्पना से लेकर हकिकत तक। 
अधेंरे  से उजाले तक  धरती से आकाश  तक । 

गुरु ने ही सिखाया  जीवन  का  पाठ
कैसे आगे बढ़े  जिससे रहे मर्यादा पूर्ण जीवन का ठाठ  बाट 

गुरु की महिमा इतनी  जितनी  कही ना जाय । 
बिना गुरु के किसी को कभी भी ज्ञान  ना  आय। 

गुरु को कोटि  प्रणाम जिनके कारण मिला हमें मान सम्मान। 
गुरु का आशीर्वाद रहे हम पर हृदय मे सदा उनका उच्च  स्थान। 

सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग.
कवियत्री  का  नाम -सावित्री यादव  "सावि "
राज्य -छ. ग. 
जिला -बिलासपुर  
शीर्षक -गुरु 
विधा - पद्य 
सम्पर्क  न. -7566685373

गुरु ही प्रथम  पूज्य  ऐसा ईश्वर  ने समझाया । 
गुरु ने ही  शिष्य  के जीवन   को महकाया। 

गुरु के ज्ञान  रूपी  छाँव मे ही शिष्य  ने आराम  पाया।  अज्ञानता  को  गुरु ने ही अपने ज्ञान  से  दूर भगाया। 

वर्ण से लेकर अक्षर तक कल्पना से लेकर हकिकत तक। 
अधेंरे  से उजाले तक  धरती से आकाश  तक । 

गुरु ने ही सिखाया  जीवन  का  पाठ
कैसे आगे बढ़े  जिससे रहे मर्यादा पूर्ण जीवन का ठाठ  बाट 

गुरु की महिमा इतनी  जितनी  कही ना जाय । 
बिना गुरु के किसी को कभी भी ज्ञान  ना  आय। 

गुरु को कोटि  प्रणाम जिनके कारण मिला हमें मान सम्मान। 
गुरु का आशीर्वाद रहे हम पर हृदय मे सदा उनका उच्च  स्थान। 

सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग.

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