Sunday, November 13, 2022

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- गुरू और परमात्मा

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- गुरू और परमात्मा 
संपर्क- 7974389033

विद्या का भंडार है,गुरुवर श्री का ज्ञान।
 बढ़े हमेशा ज्ञान से,मान और सम्मान।1।

अंर्तमन को शांत रख,सुखमय होता आत्म।
नेक कर्म सत राह से, दर्शन होत परमात्म।2।

मन में वास सदैव हो, परमात्मा अहसास।
गुरु पर रखो सदैव ही, मन से तू विश्वास।3।

 गुरु विद्या की खान है, गुरु का है सम्मान।
गुरुवर से हमको मिला,विद्या का वरदान।4।

गुरुवर श्री के ज्ञान से, बनता सदा सुकाज।
चले कठिन खुद राह में,मेवा देते साज।5।

मन की है यह भावना,गुरू ज्ञान भण्डार।
 हमें मिला सच्चा गुरू,और मिला संस्कार।6।

शिष्यों पर करता गुरू,हरपल ही अभिमान।
शिष्य सभी करते यहाँ, गुरुवर का सम्मान।7।

     परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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