Wednesday, November 9, 2022

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की कृत आलेख- प्रेम

लेखिका- उर्मिला सिदार
जिला- रायगढ़
राज्य- छत्तीसगढ़ 
विधा -गद्य
शीर्षक- प्रेम 
संपर्क- 930 32 98 994
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प्रेम एक भाव है। अस्तित्व में कुल 30 भाव नित्य वर्तमान विद्यमान है। 30 मूल्य में 28 मूल्य जीवन पक्ष में एवं 2 मूल्य जड़ वस्तु के लिए गण्य है।सभी मूल्यों का अर्थ है। 9 स्थापित मूल्य,9 शिष्ट मूल्य ,6 मानव,जीवन मूल्य4+2जड़मूल्य,  कुल मिलाकर सभी मूल्य 30 है। इन्हीं मूल्यों में से एक मूल्य है ,प्रेम जिसे पूर्ण मूल्य कहा जाता है। प्रेम का शिष्ट मूल्य है अनन्यता। इस अस्तित्व में कोई अन्य नहीं है सब मेरे संबंधी हैं इसी भाव से संबंधी के प्रति व्यवहार कार्य अपनत्व भाव से करते हैं। वही प्रेम भाव है। बिना प्रेम का कोई संबंध नहीं होता। अगर संबंध में प्रेम है, तो उसके पूर्व विश्वास होता ही है। विश्वास मूल्य जीने का आधार मूल्य है ।बिना विश्वास का प्रेम भाव नहीं बनता और जहां प्रेम होता है वहां विश्वास होता ही है और जहां विश्वास होता है वहां प्रेम होता ही है। दोनों मूल्य एक दूसरे के पूरक हैं। जहां प्रेम होता है वहां अपना पराया की दीवार खत्म हो जाता है और अपनत्व का भाव व्यक्त करते हुए संबंधों के प्रति उपयोगिता और पूर्णता के अर्थ में व्यवहार कार्य करते हैं। अस्तित्व में विकास क्रम विकास एवं जागृति क्रम जागृति है। इस विकास और जागृति दोनों में प्रेम भाव दिखता है। प्रेम भाव ही, मानव को एक दूसरे के प्रति अपनत्व भाव को व्यक्त करता है। प्रेम भाव में अपनत्व होता है, अपना पराया नहीं ।यही प्रेम का अर्थ है। प्रेम भाव में हर संबंधों को स्वीकारते हैं ।अपनाते हैं ।उसे घृणा या उपेक्षा, तिरस्कार नहीं करते यही भाव प्रेम भाव को दर्शाता है। यही प्रेम है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़

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