कवि :- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
राज्य :- छत्तीसगढ़
विषय :- प्रेम
विधा :- कविता
संपर्क :- 9669360722
प्रेम अधूरा होता है
शब्द से भी, भाव से भी
प्रेम और भी गहरा होता है
विरहन से, अलगाव से भी
प्रेम अपनी पूर्णता के लिए
दर-बदर भटकता है
दुनिया वालों की नजरों में
अक्सर प्रेम खटकता है
प्रेम पारदर्शी होता
प्रेम निश्छल, निर्मल होता है
हर नवांकुर भौंरे को आकृष्ट करता
सुरभित कमल दल होता है
No comments:
Post a Comment