लेखिका - गोमती सिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक- गुरू
--गुरू एक ऐसे मार्गदर्शक है , एक ऐसे दीपक हैं जिनके प्रकाश की सीधी पगडंडि से समर्पण भाव से आगे बढते रहें तो एक दिन अवश्य ही हमें परमप्रकाश की प्राप्ति होती है । उस परम प्रकाश से मिलनें पर हमारा रोम रोम प्रकाशमय हो जाता है ।
हाँ! गुरू ऐसे दीपक हैं, ऐसे पथ प्रदर्शक हैं।
गुरू की महिमा अनंत है । गुरू में आनंद है , गुरू में समष्टि है , गुरू में सृष्टि है , गुरू में दृष्टि है , गुरू में ज्ञान है गुरू महान हैं।
।।इति।।
-गोमती सिंह
कोरबा, छत्तीसगढ़
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