रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी , कंवर
जिला - बालोद
राज्य - छत्तीसगढ़
विधा - गीत
विषय - छत्तीगढ़ी
झन बन अभिमानी काया ,
चारेच दिन के रे माया ,
जाना है संगी साथी छोड़ , जाना है ....
तन के राहत ल रे संगी ,
हवे धन मान - बड़ाई ,
जीयत-जीयत गाँठ जोड़ , जाना है ....
काम नई आये तोर धन - दौलत ह न कोई कुल परिवार ,
सत संगत हे सरग निसैनी इही हे जिनगी के सार ,
कुछु- कोनो -कोई काम नई आवे कतको कर ले रे मोर - मोर , जाना है ......
अपन - बेगाना सब भरम ए संगी ये सच्चाई ल जान ,
धरम - करम म ध्यान लगा ले अब रे कहना ल मान ,
तिनका तको तोर साथ नई जाए कतको सकेल ले लाख - करोड़ , जाना है .........
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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