वरिष्ठ साहित्यकार गुलाब सिंह रचना- भेद भाव तैं पाट
*भेद भाव तैं पाट*
सबो ला अपना जानो
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(कुंडलियां छंद छत्तीसगढ़ी)
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मनखे -,मनखे एक है,
मन में लाओ भाव।
बड़े - छोट के बात ले,
झन कर दिल में घाव।।
झन कर दिल में घाव,
सबो ला अपना जानो।
भेद - भाव तैं पाट,
चलो दिल मेंअब ठानो,
कह "गुलाब "मन सोच,
करो सेवा जन -जन के।
जीवन है अनमोल,
जनम तैं पाए मनखे।।
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...✍️गुलाब कंवर🌹
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