Friday, October 14, 2022

रायगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार गुलाब सिंह की रचना- भेद भाव तैं पाट

वरिष्ठ साहित्यकार गुलाब सिंह रचना- भेद भाव तैं पाट
*भेद भाव तैं पाट*
 सबो ला अपना जानो 
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(कुंडलियां छंद छत्तीसगढ़ी)
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मनखे -,मनखे  एक है,
मन   में  लाओ  भाव।
बड़े - छोट  के बात ले,
झन कर दिल में घाव।।

झन कर  दिल में घाव,
सबो ला अपना जानो।
भेद -    भाव  तैं  पाट,
चलो दिल मेंअब ठानो,

कह "गुलाब  "मन सोच,
करो सेवा जन -जन के।
जीवन    है    अनमोल,
जनम तैं  पाए  मनखे।।
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...✍️गुलाब कंवर🌹

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