जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-तेजस
विधा- कविता( मुक्त छंद)
गुलमोहर,अमलतास व
चंपा की चंपई आभा भी
बयाँ करते हैं तेजस|
छिटकती चांदनी के साथ
शुभ्र श्वेत आभा युक्त शशि
बिखराती है तेजस|
प्रेम ,दया,करुणा और धैर्य
नगीने हैं मानव में निहित,
बढ़ा देते हैं तेजस|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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