जिला-रायपुर
विषय-व्यवहार
विधा-कविता
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दिलों से दिलों का, करार करता है|
जो भी करता है, व्यवहार करता है|
फरेबी जुबाँ से, फूल मत बरसाइये,
ये जुबाँ भी, बहुत व्यापार करता है|
मेरे सीने में गर, तेरा दिल धड़कता है,
यूँ ही नहीं है, जो मुझे बेकरार करता है|
मिली है वो मुझे फूल की खुशबू की तरह,
वीरान गुलशन को, जो गुलजार करता है|
भीगकर देखना, उसके आँसुओ में कभी
अमित आब ए गंगा , स्वीकार करता है|
अमिताभ कुमार दीवान
रायपुर
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