स्थान - दुर्ग ( छ.ग.)
विधा- कविता छंद मुक्त
विषय - तेजस
शीर्षक -
*तमस का तेजस*
जाने क्यूँ ..
पल-पल बदलता है मन
कभी खुशियों का झोंका
कभी उदासियों की कहर
खोजती हूँ क्या ?
यह मेरे लिये ही पहेली
मन की खिन्नता..
ऊथल-पुथल अन्तर्मन की
जाने क्या करती है तलाश
और फिर..
हौले से कोई आकर ठिठोली करता,
मेरी पीड़ा आँखो में पढ़कर
गुदगुदाहट भरी मस्ती से
उल्लास भरता
मन के एकांत कोने में था
जो तमस
उदीप्त कर देता वो बन
तेजस ।
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