संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
आलेख विषय-विचार,दिनाँक-01.06.21
*विचार*
*मन में "सही,गलत,तर्क वितर्क करते हुए सोचना,समझना ही विचार कहलाते है।*"
किसी भी विषय पर अपनी सोच प्रकट करना भी विचार कहलाता है।
संसार में मनुष्य ही एक बुद्धिवान प्राणी है ।मनुष्य में ही सोचने,समझने और विचार व्यक्त करने की क्षमता होती है। जीव - जंतुओं में सोचने, समझने बोलने विचार करने की क्षमता नहीं होती है।
मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो अपने विचारों के द्वारा अपने को चाहे आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँचा दें, या जीव- जंतुओं के समान जीवन यापन करने को मज़बूर होता है। विचारों से व्यक्ति महान बनता है और लोगों के मार्गदर्शक भी बन जाते हैं।
किसी भी विषय पर अलग-अलग व्यक्तियों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं। यदि किसी विषय पर हमारे विचार या सोच सकारात्मक होगी, तो किसी की सोच नकारात्मक भी हो सकती है।
किसी भी विषय पर शब्दों, उदाहारणों, तथ्यों तथा अपने अर्जित ज्ञान के आधार पर अपनी बात को रखना ही विचार कहलाता है। यह गद्य और पद्य दोनों में हो सकते हैं ।भाषा स्वतंत्र और सार्थक प्रवाह शैली में होती है। किसी भी राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, एवं दर्शन आदि के क्षेत्रों में कोई विचार या चिंतन करना है।वह स्वतंत्र विचार कहलाता है। अगर हमारे विचार अतार्किक होंगे, विज्ञान सम्मत ना होंगे तो हमारे विचारों की आलोचना होगी ।अगर हम तथ्यात्मक बातों को ध्यान में रख कर लेखन करते या विचार लिखते हैं, तो सत्यापित करने वाली कोई बात नहीं होती है। लोग स्वतः ही उस विचार को स्वीकार कर लेते हैं।
हमारे विचार यदि तथ्यात्मक होंगे तो, आज के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता की बात होती है। विश्व के बड़े-बड़े विचारक, दर्शन शास्त्रियों के लेख समाज को बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं। जैसे -"महात्मा गाँधी, मार्टिन लूथर किंग, विवेकानंद नेल्सन मंडेला, के विचार पूरे विश्व को प्रभावित करते हैं । उनके विचारों से मनुष्य का सर्वांगीण विकास के साथ आदर्श चरित्र एवं आदर्श नागरिक का निर्माण कर उसे स्वालंबन की ओर ले जाना होता है।
विचार से व्यक्ति बनते महान।
अच्छे विचारों से करें राष्ट्र- निर्माण।
मानवोचित विचारों से होता
सदा ,
विकास और जनकल्याण।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर( छ. ग.)
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