गीतकार-जितेन्द्र हमदर्द
विधा-गीत
शीर्षक-एक पल भी.
दूर होगी मुझे से तू,ये सुना नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।
दिल मे हो,मन मे हो,तू है मेरा जहाँ।
तेरे बिन मुझकों,एक पल चैन कहाँ।
तुझको देखे बिना,मुझ से रहा नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।
मंजिल अपनी छोड़ दी,सनम तेरे लिए।
ख़ुदा से भी मन्नत की,रावत तेरे लिए।
ख़्वाब तेरे सिवा,कोई देखा नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।
ना ख़ुशी कोई,ना ही जन्नत चाहिए।
तेरे दिल में मुझे,बस जगह चाहिए।
तू किसी संग हो,ये सोचा नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।
ये ख़ुदा तुझ को भी,नही दिखता क्या।
कुछ तू भी क्यों,नही करता बयां।
क्या तुझे से,मेरा प्यार देखा नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।
दूर होगी मुझ से तू,ये सुना नही जाता।
एक पल भी तेरे बिन,रहा नही जाता।।
जितेन्द्र हमदर्द
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