डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय:- पर्यावरण
विधा :- चौपाई छंद
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विपदा में है वसुधा सारी ।
व्याकुल हैं सब नर अरु नारी ।
चलो चलें सब माँ के द्वारे ।
निर्मल मन से सभी पुकारें ।
बन जायेंगे काम हमारे ।
मन से कभी न कोई हारे ।
वसुधा को हम चलो सँवारें ।
मिलजुलकर अब रहना प्यारे ।
मात हमारी रक्षा करना ।
वसुधा की विपदा तुम हरना ।
धरती माता तुझे पुकारे ।
मात हरो अब संकट सारे।
धरती सारी जलती जाये।
वन उपवन सब घटते जाये ।
चलो चलें हम पेड़ लगायें ।
सबका जीवन चलो बचायें ।
नीर पवन थल दूषित होते ।
जलचर थलचर नभचर रोते ।
दिन दिन दूषण बढ़ता जाए ।
प्राण वायु अब घटता जाए ।
जन जन में हम अलख जगायें ।
जल की रक्षा करते जायें ।
पेड़ लगाएँ पेड़ बचायें ।
धरती को हम स्वर्ग बनायें ।
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कविवर आदरणीय श्री गजेन्द्र हरिहारनों जी को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई
ReplyDeleteबहुत खूब आदरणीय
ReplyDelete🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteबहुत सुंदर सृजन आदरणीय .....
"वसुधैव कुटुंबकम्"
बहुत सुन्दर आदरणीय
ReplyDeleteबहुत सुंदर सृजन
ReplyDeleteबहुत ही सरस,प्रवाहमयी,गेय,प्रेरणादायक,संदेशपरक कविता सृजन के लिए हार्दिक बधाई
ReplyDeleteधरती को हम स्वर्ग बनायें।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया रचना बधाई हो आदरणीय हरिहारनो सर जी 🙏🙏🙏