Thursday, June 10, 2021

छत्तीसगढ़ से गजेन्द्र हरिहारनो" दीप" की रचना- पर्यावरण

रचनाकार :- गजेन्द्र हरिहारनो" दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय:-  पर्यावरण
विधा :- चौपाई छंद
------------------------------------
विपदा में है वसुधा सारी ।
 व्याकुल हैं सब नर अरु नारी ।
चलो चलें सब माँ के द्वारे । 
निर्मल मन से सभी पुकारें ।

बन जायेंगे काम हमारे ।
 मन से कभी न कोई हारे ।
वसुधा को हम चलो सँवारें ।
 मिलजुलकर अब रहना प्यारे ।

मात हमारी रक्षा करना ।
वसुधा की विपदा तुम हरना ।
धरती माता तुझे पुकारे ।
मात हरो अब संकट सारे।

धरती सारी जलती जाये।
वन उपवन सब घटते जाये ।
चलो चलें हम पेड़ लगायें ।
सबका जीवन चलो बचायें ।

नीर पवन थल दूषित होते ।
जलचर थलचर नभचर रोते ।
दिन दिन दूषण बढ़ता जाए ।
प्राण वायु अब घटता जाए ।

जन जन में हम अलख जगायें ।
जल की रक्षा करते जायें ।
पेड़ लगाएँ पेड़ बचायें ।
धरती को हम स्वर्ग बनायें ।
--------------------------------
       

7 comments:

  1. कविवर आदरणीय श्री गजेन्द्र हरिहारनों जी को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई

    ReplyDelete
  2. 🙏🙏🙏🙏
    बहुत सुंदर सृजन आदरणीय .....
    "वसुधैव कुटुंबकम्"

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर आदरणीय

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सरस,प्रवाहमयी,गेय,प्रेरणादायक,संदेशपरक कविता सृजन के लिए हार्दिक बधाई

    ReplyDelete
  5. धरती को हम स्वर्ग बनायें।
    बहुत बढ़िया रचना बधाई हो आदरणीय हरिहारनो सर जी 🙏🙏🙏

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...