रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-काव्य
विषय-अकिंचन
आज करती हूं मैं गुहार प्रभु
सुन लो मेरी पुकार प्रभु
तेरे दरबार में अकिंचन सी मैं
बस तुझपर ही है एतबार प्रभु
तेरा दिया हुआ ये जीवन
व्यर्थ ना बीत जाए
सार्थक करूं मैं इसे
कुछ तो करो उपाय
हो ना मुझसे बुरा किसी का
कुछ तो भला कर जाऊं प्रभु
सदा आदर्श बन जग में
भूले भटकों को राह दिखाऊं
भले अकिंचन सी मैं धरा पर
अपने होने का सबब जान पाऊं
सदा बड़ो के सामने झुक कर
आशीष और प्यार पाऊं प्रभु
आज प्रार्थना है तेरे दर से
खाली हाथ ना जाऊं प्रभु।।
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