रचनाकार-अमिताभ कुमार दीवान
जिला- रायपुर
विधा-कविता
विषय-अकिंचन
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आदत हूँ मैं ,लत में ,बदल जाऊँगा एक दिन|
ए तालाब तुझमें,कमल सा खिल जाऊँगा एक दिन
हर जगह ढूँढेंगी, तेरी निगाहें मुझको,
कुछ इस तरह तुझमें, मिल जाऊँगा एक दिन|
मेरी यादों में तेरी आँखें डबडबा जाएँगी,
आँखों से तेरे, आँसू बन, बह जाऊँगा एक दिन|
हाथ उठेंगी सदा तेरी आशीषों से भरपूर,
तेरे दिल की दुआ,बन जाऊँगा एक दिन|
जिंदगी है तो जख्म भी है, अंतर्मन में
तेरे अंतर्मन की दवा बन जाऊँगा एक दिन|
प्रेम अंतर्मन में ,दबे पैरों की आहट है,
तेरी हर मुस्कुराहट में, नजर आऊँगा एक दिन|
हवाएँ चूम लेंगी जब, तेरे गालों की ये लाली,
उड़तें तेरे आँचल से ,मुस्कुरा जाऊँगा एक दिन|
अमित खुद तो अकिंचन है,पर भावों से है हरा भरा,
तुझको प्रतिपल भावों से, सम्पन्न कर जाऊँगा एक दिन|
अमिताभ दीवान
रायपुर
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