जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-अंधविश्वास
विधा-रेखाचित्र
मैं तब बहुत छोटी थी|गांव में जंवारा विसर्जन का कार्यक्रम था|बाजे की थाप पर सभी देवी- देवताओं की टोली झुमते हुए आगे बढ़ रही थी|कौतुहल वश माँ से पूछकर मैं भी सहेलियों के साथ चल पड़ी थी|
रास्ते में कुछ सुहागन महिलायें गुंड़ी में पानी लेकर खड़ी थीं,टोली के पास आने पर अपने ऊपर पानी डाल तपते जमीन पर आड़े लेट गई|लोग उन्हें लांघ कर जा रहे थे|थोड़ी दूर जाने पर फिर वही दृश्य| समझ नही आ रहा था| वे ऐसा क्यों कर रही हैं|
पड़ोस की मामी ने बताया,उनके बच्चे नहीं हैं,ऐसा टोटका करने से बांझपन खत्म हो जाता है|विज्ञान की तरक्की के बाद भी ऐसा अंध विश्वास कायम है|इससे महिलाओं का जीवन जीना दूभर हो जाता है|ऐसे अंध -विश्वासों पर रोक लगाना चाहिए|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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