Thursday, June 3, 2021

उर्मिला सिदार कृत रेखाचित्र- अंधविश्वास

लेखिका - उर्मिला सिदार
दिनांक - 03/06/2021
विधा - रेखा चित्र
विषय - अंध विश्वास
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      **//अंध विश्वास//**
मैं दरवाजे खड़ी मेरी पोती की आने का इंतजार कर रही थी।दूर से लड़खड़ाते चाल में आहिस्ता- आहिस्ता आगे बढ़ पांव चला रहा था। सामने आने से देखी मुकुंद था ।मेरी पड़ोसन का बेटा मै पास जाकर आवाज दी सुना, मगर उसका जवाब देने में मन नहीं बना। मै उसकी स्थिति देख भाँप गयी ,कि इसका तबीयत ठीक नहीं लग रहा है और मै तुरंत उस का बस्ता लेकर सहारा देकर घर पहुंचायी ।उसकी माँ को आवाज लगाई, आवाज सुनते ही झट से आई ।मुकुंद की हालत देख कर हकलाई, तुरंत खाट में लेटा कर मुकुंद से पूछने लगी और शरीर की तापमान चेक की तो आग की तरह उसका बदन जल रहा था। मुकुंद की माँ तेल लाकर हाथ पैर में तेल डाली और अपने गाँव की ओझा को बुलाने भेजी, मै उसे ओझा बुलाने के सिवाय डॉक्टर को दिखाने के लिए बोली वह प्राथमिकता नहीं दी, मै वही ठहरी रही, कुछ देर बाद मुकुंद को कप कपी आया और पानी -पानी चिल्लाने लगा, और ठंड लग रही है ।मुझे बिस्तर ओढ़ा दो बोला। उसकी माँ बिस्तर ओढ़ाई कुछ देर बाद पसीना आने से बुखार उतर गया ।तब तक ओझा आया सारी घटना सुन कर कहा। कुछ नज़र लगा है, नारियल लाओ मै फ़ूक झाग कर दूँगा कह कर बच्चे की शरीर छू कर बोलने लगा अभी बुखार नहीं है ।मेरे आते ही बुखार उतर गया  कह कर नारियल पकड़ कर भभूत से मंत्र पढ़ कर फ़ूक कर चला गया।मै स्थिति ठीक होने से घर आ गयी ।कुछ देर बाद मुकुंद को पुनः कपकपी से बुखार चढ़ने लगा ।मुझे उसकी बहन ने घर बुलाने गयी थी।वह। बुखार के बारे मे बतायी। मै तुरंत आई और मुकुंद की माँ से बोली जितनी जल्दी हो सके इसे डॉक्टर के पास ले जाओ ।यह मलेरिया है ।ओझा के चक्कर मे मत पड़ो ।यह सब अंध विश्वास है। इसके चक्कर में रहोगे तो और मुसीबत में पड़ जाओगे ।तब तक मुकुंद के पिता जी आ चुके थे।
 डॉक्टर के पास ले जाने का निर्णय लिए और और डॉक्टर के पास ले गए ।वहां अच्छे से मलेरिया का ईलाज हुआ। पांच दिन बाद मुकुंद स्वस्थ्य हो कर घर लौटा, मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था ।आंटी जी आपको बहुत- बहुत धन्यवाद, आपके वजह से आज मैं , जल्दी स्वस्थ हो कर घर  लौट, आया।
            अंध विश्वास हमेशा समस्या उत्पन्न करता है अतः सही समाधान क्या हो सकता है। इस पर अमल करने से अर्थात सही को जान कर उसी संदर्भ में कार्य किया जाता है, तो सफलता ज़रूर मिलती है।
                                    उर्मिला सिदार
                                रायगढ़, छत्तीसगढ़
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