रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - श्रृंगार
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - भक्त का श्रृंगार
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// भक्त का श्रृंगार //
भक्त का अद्भुत है श्रृंगार ।
प्रभु से करते अनन्त प्यार ।।
दया धरम की धोती कुर्ता ।
धवल पीत रंग प्रेम पुनीता ।।
संयम शिखा की बाँधे गाँठ ।
ज्ञान का चन्दन टीका माथ ।।
छोड़े सारे विषय - विकार ।
गले में भक्ति - भाव के हार ।।
वैराग्य की खड़ाऊ - चप्पल ।
हरि दर्शन के प्यासे हर पल ।।
ओढ़े सत्संग की वह छतरी ।
इन्द्रिय मन बुद्धि के प्रहरी ।।
जप तप कीर्तन ध्यान साधना ।
साधक भक्तों का है गहना ।।
प्रभु दर्शन की प्यास जगी है ।
मधुर मिलन की आस लगी है ।।
जीवन भर का सजना सँवरना ।
क्योंकि प्रभु के पास पहुँचना ।।
यह आध्यात्मिक सहज श्रृंगार ।
भक्तों का दैवी शुभ संस्कार ।।
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