जिला - महासमुंद
राज्य -- छत्तीसगढ़
विषय - "बरखा रानी "(बरसात)
मुखड़ा--हँसते हँसाते गुनगुनाते ,
बरखा रानी आई है ।
काले-काले बादल घिरते ,
बिजुरी चमक सजाई है।
गोल - गोल बरखा की बूँदें ,
पड़ती धरती का आँगन ।
मोती जैसे चमचम चमके ,
पावस ऋतु शुभ मनभावन ।
अंबर घुम - घुम खेले बूँदे ,
रूप सलौना पाई है।
हँसते हँसाते गुनगुनाते ,
बरखा रानी आई है......।।2।।
सारी दुनिया शीतल लगते ,
बरखा रिमझिम बरसे ।
पेड़ पौधे हरियाली लेते ,
पशु पक्षी जीवन हरसे ।
मेघ बजाते ढोलक देखो,
बिजली यौवन पाई है।
हँसते हँसाते गुनगनाते ,
बरखा रानी आई है .....।।2।।
ताल - तलैया छलछल करते ,
सागर लहरें तट झूमें ।
मोर पपीहा गीत सुनाते ,
दादुर टर्र- टर्र कर चूमें
उतरी भू पर परियों जैसी ,
हौले पांव धराई है ।
हँसते हँसाते गुनगनाते ,
बरखा रानी आई है ..... ।।2।।
कर्म क्षेत्र पर चलते किसान ,
खेतों पर फसल ऊगाने।
तिनका लेकर पक्षी चलते ,
वृक्षों पर नीड़ बनाने
हरियाली की चुनरी ओढ़े,
वसुंधरा मुस्काई है ।
हँसते हँसाते गुनगनाते ,
बरखा रानी आई है ....।।2।।
पुष्पा गजपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)
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