Wednesday, June 16, 2021

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- बरखा रानी

नाम - पुष्पा गजपाल पीहू
जिला - महासमुंद
राज्य -- छत्तीसगढ़
 विषय - "बरखा रानी "(बरसात)

मुखड़ा--हँसते हँसाते गुनगुनाते , 
                बरखा  रानी आई है ।
          काले-काले बादल घिरते , 
               बिजुरी चमक सजाई है।

गोल - गोल बरखा की बूँदें ,
         पड़ती  धरती का आँगन । 
मोती जैसे चमचम चमके , 
         पावस ऋतु शुभ मनभावन ।
अंबर घुम - घुम  खेले  बूँदे , 
          रूप    सलौना  पाई  है।
हँसते हँसाते गुनगुनाते   ,
       बरखा  रानी   आई है......।।2।।


 सारी  दुनिया  शीतल लगते , 
        बरखा  रिमझिम  बरसे ।
पेड़   पौधे  हरियाली लेते , 
         पशु  पक्षी  जीवन  हरसे ।
मेघ  बजाते ढोलक देखो,
        बिजली  यौवन  पाई  है।
हँसते  हँसाते गुनगनाते , 
          बरखा   रानी  आई  है .....।।2।।

ताल - तलैया  छलछल करते , 
         सागर लहरें तट झूमें ।
मोर पपीहा गीत सुनाते , 
        दादुर टर्र- टर्र कर चूमें 
 उतरी भू  पर परियों जैसी ,
        हौले  पांव   धराई  है ।
हँसते हँसाते  गुनगनाते ,
         बरखा  रानी  आई  है ..... ।।2।।


कर्म क्षेत्र  पर चलते किसान ,
       खेतों पर फसल ऊगाने।
तिनका लेकर  पक्षी चलते , 
            वृक्षों पर नीड़ बनाने
हरियाली की चुनरी  ओढ़े,
          वसुंधरा मुस्काई है ।
हँसते हँसाते  गुनगनाते ,
      बरखा रानी आई है ....।।2।।

 
पुष्पा गजपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)

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