दिनांक-07/06/2021
विधा-कविता(छंद मुक्त)
विषय-"तेजस"
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*तेजस*
धीरता ,वीरता ,उदारता से,
दया ,कृपा, करुँणा बहाइये।
मन की आवेश खो कर मनु,
जग में तेजस जीवन बनाइये।
तन,मन,धन सदुपयोग कर,
जीवन पथ सार्थक बनाइए।
संवेदनाएं संतुलित कर नर,
तेजस जिंदगी बिताआए।
सुख ,शांति ,संतोष ,आनंद ,
अंतस मे ज्ञान मूल्य बनाइए।
प्रेम ,स्नेह भाव तेजस कर,
संस्कारीक समाज बनाइए।
चित्त , बुद्धि से अहंकार त्याग,
मन, वृत्ति सेअभिमान भगाइए।
आत्मा की ज्योति तेजस कर,
दिव्य ज्योति से परमानंद पाइए।
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उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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