जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - परामर्श
विधा - लघुकथा
शीर्षक - संवेदना और सलाह
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// संवेदना और सलाह //
एक बड़े शहर में दीपक डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था । वह छुट्टी में गाँव आया हुआ था । सारे गाँव वालों को गर्व था कि उनके गाँव का लड़का दीपू शहर में डॉक्टरी पढ़ रहा है ।
एक दिन दोपहर को उनकी दादी भोजन करके उठते समय अचानक गिर पड़ी । शरीर ढीला पड़ गया । किसी तरह बिस्तर पर लिटाया गया । दीपक ने जाँच किया तो पता चला उनकी 70 वर्षीय दादी लकवाग्रस्त हो गयी है । दीपक उनके इलाज के लिए कुछ सोच ही रहे थे कि गाँव के सारे लोग देखने और हालचाल जानने दीपक के घर आने लगे । भीड़ बढ़ने लगी । क्या हुआ ? कैसे हुआ ? प्रश्नों की बौछार होने लगी । जितनी मुँह उतनी बातें । इलाज के लिए हर आदमी अपने ढंग से सलाह देने लगा । ऐसा करो , वैसा करो , अमुक बैदराज के पास ले चलो , वहाँ का हॉस्पिटल ठीक है । इस प्रकार हर कोई बिना पूछे मुफ्त में सलाह देने लगा ।
दीपक का दिमाग चकरा गया । लोगों के शोरगुल एवं असंख्य सलाह - संवेदना से झल्लाकर कहने लगा - आप सब इतने ज्ञानी और बुद्धिमान हैं तो मेरी डॉक्टरी पढ़ाई का क्या मतलब है ? मुझे भी अपना दिमाग लगाने दो । आप लोग डॉक्टर , वकील , वैद्य या कोई संत - महापुरुष हैं क्या जो एक से बढ़कर एक सलाह दिए जा रहे हो ? आप सबकी सहानुभुति और प्रेम तो ठीक है लेकिन ये ऊटपटांग सलाहहह .........प्लीज !
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