स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- लघु-कथा
शीर्षक -"परामर्श"
****************
परामर्श से परेशानियां कम होती हैं। दो जुड़वा भाई थे ,दोनों के रंग रूप,कद काठी एक जैसी थी एक भाई खूब पढ़ा और दूसरा ज्यादा पढ़ न सका। ज्यादा पढ़ा-लिखा ना होने के कारण पहला खुद को दूसरे भाई से श्रेष्ट समझने लगा और एक दिन वह अपने निवास स्थान से दूर अच्छे काम की तलाश में चला गया और वापस नहीं लौटा।इधर दूसरा भाई गांव में ही अपने बुजुर्गों से सलाह लेकर व्यापार शुरु किया। सदा कुछ करता तो बड़ों से परामर्श अवश्य लेता। एक समय आया कि वह नामी सेठ बन गया। एक बार सेठ अपने परिवार को लेकर छुट्टी मनाने किसी हिल स्टेशन में गए और फाइव स्टार होटल में रुके उन्होंने रुम सर्विस वाले को फोन करके खाना मंगाया थोड़ी देर में रूम की बेल बजी और उन्होंने दरवाजा खोला तो वे स्तब्ध रह गए । दरवाजे पर उनका वही भाई खड़ा था जो सालों पहले घर छोड़कर निकल गया था।
समय- समय पर परामर्श लेने से सही रास्ता सही मंजिल तक अवश्य पहुंचाती है बशर्ते कि परामर्शदाता निश्छल हो।
No comments:
Post a Comment