जिला-कांकेर,छग
विषय-विचार
विधा- आलेख
शीर्षक-असंभव कुछ भी नहीं|
"मन के हारे हार है और मन के जीते जीत|" यह कहावत आप सबने सुनी होगी| जो व्यक्ति दृढ़ संकल्पित होता है,वह असंभव लगने वाले कार्य को भी आसानी से कर लेता है|वहीं अकर्मण्य व्यक्ति राई को पहाड़ बता आलस का चादर ओढ़ अनुकूल परिस्थिति का इंतजार करता रहता है|कभी -कभी विपरीत परिस्थितियां सफलता का पैगाम लेकर आती हैं| बिना उत्साह के कभी भी उच्च लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती|हम असफलता मिलने पर निराश हो जाते हैं ,जबकि असफलता इस बात को सिद्ध करती है कि दिये गये कार्य को हमने सही तरीके से नहीं किया|आपने देखा होगा,असंभव लगने वाले कार्य को दिव्यांग व्यक्ति भी कर लेता है|लोग सोचने लग जाते हैं ,यह कैसे संभव हो गया|मन जिसका मजबूत हो,वह असंभव को संभव कर सकता है|
दृढ़- संकल्प से दुविधा की बेड़ियां कट जाती हैं|ज्यादा सुख -सुविधाएं पाकर मनुष्य अकर्मण्य हो जाता है|नेपोलियन बोनापार्ट की डिक्शनरी में असंभव नाम का शब्द नहीं था|एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा-क्या यह भी संभव है कि छलनी में हम पानी डालें और वह नीचे न गिरे|नेपोलियन ने मुसकुराते हुए कहा-बिलकुल संभव है|उस व्यक्ति ने उत्सुकता वश पूछा कैसे? नेपोलियन ने कहा- पानी के बर्फ बनने तक इंतजार करना होगा|
आइये जीवन के बचे हुए पल को हम यादगार बना दें,कुछ रचनात्मक कार्य करके|कभी कोई हमारे संस्मरण पढ़ें तो कहें -"अरे! हम ऐसा क्यों नहीं हुए?"
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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