Saturday, June 12, 2021

ग़ज़ल : नलिनी बाजपेयी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला-कांकेर( छ.ग.)
            गजल सृजन
          काफ़िया- आती,
          रदीफ-होगी क्या
         दिनाँक-12.06.21
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मेरी याद तुम्हें रूलाती होगी क्या?
जख्म भरे दिल को सहलाती होगी क्या?

मैं गीत,गजल बन गया था प्यार में कभी।
वो गीत कभी तो गुनगुनाती होगी क्या?

मुझे याद आता है वह दिलकश नजारा।
ख्वाबों में कभी झलक दिखाती होगी क्या?

फूलों सा नाजुक ये तन है तुम्हारा।
प्रीत की बगिया को महकाती होगी क्या?

तेरा इश्क मुझे जीने नहीं देता " *नलिन*"। 
दिल में छुपी पीड़ा  छुपाती होगी क्या?

        नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर( छ.ग.)

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