Saturday, June 12, 2021

आना तुम मेरे पास : मीराआर्ची चौहान

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-आना तुम मेरे पास प्रिये|
विधा-मुक्त छंद

सांझ -सा  उम्र जब ढलने लगे,
मन पंछी की तरह तड़पने लगे|
अपने बेगाने बन भड़कने लगें,
तब तुम आना मेरे  पास  प्रिये|

सिंदूरी शाम जब दहकने लगे,
 पंछी पेड़ों पर  यूं चहकने लगें|
 मन यूं अचानक बहकने लगे,
 तब आना तुम मेरे पास प्रिये||

सपनों की  बगिया  झुलसने लगे,
ठोकरें खा मन जब भटकने लगे|
प्रेम के बोल को मन तड़पने लगे|
 तब आना तुम मेरे  पास  प्रिये||

मन का कोई कोना झुलसने लगे,
अपनों के लिए मन तरसने लगे|
आंखों से अश्रु धार बरसने लगे,
तब  आना तुम  मेरे पास प्रिये||

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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