स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक -"माँ"
***********************
मां तो मां होती है,
इसके जैसा नहीं कोई दूजा।
हर लड़की एक दिन मां बनती है,
सो इसकी करो हमेशा पूजा।
मातृशक्ति यदि नहीं बची तो,
बाकी यहां रहेगा कौन ?
प्रसव वेदना लालन-पालन,
सब दुख दर्द सहेगा कौन ?
मानव हो तो दानवता को त्यागो
फिर यह उत्तर दो ।
एक नन्ही सी गुड़िया के दुश्मन को,
इंसान कहेगा कौन?
No comments:
Post a Comment