जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - माँ
विधा -छंद मुक्त कविता
शीर्षक - माँ के विविध स्वरूप
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// माँ के विविध स्वरूप //
माँ के विविध स्वरूप का ,
आज करूँ मैं वर्णन ।
लेकिन पहले उन सबको ,
मेरा वंदन और नमन ।।
गर्भ में धारण करनेवाली ,
जन्मदात्री माँ कहलाती ।
जिनके आगे स्वर्ग तुच्छ है ,
वात्सल्य स्नेह बरसाती ।।
पालन - पोषण करनेवाली ,
धाय माँ भी माँ ही है ।
दादी नानी ताई बुआ ,
सौतेली माँ माँ ही है ।।
बड़ी बहन चाची मामी ,
माँ सम होती भाभी ।
सासु माँ तो माँ ही है ,
रिश्तों की पावन बाती ।।
गुरुपत्नी और राजपत्नी ,
ब्राम्हणपत्नी ऋषिपत्नी ।
सबकी माता कहलातीं ,
जैसी जननी माँ अपनी ।।
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