रचनाकार-एच-एस-अरमो अरमान ।
निवास-बायरन बाज़ार,रायपुर,छ.ग.।
विषय--"" प्रवाह "" ।
विधा-कविता,छ्न्द मुक्त ।
शीर्षक-" प्रवाह " ।
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○○•••|| प्रवाह ||•••○○
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प्रकृति और प्रवाह ---
सरिता और उसका प्रवाह,
श्वाँस और शरीर ,
रक्त और वाहिकायें,
ही,जीवंतता देती है ।
सामाजिक--संवाद में---
प्रवाह-गति बिन अधूरी,
वक्ता-श्रोता बिन होता है,
संवाद अधूरा--
अधूरे मन से,कही-सूनी ,
बातें,सतत् प्रवाह अवरोधक,
नियति प्रवाह की,गतिशीलता है ।
अँधेरे में,उजाले का प्रवाह--
हवा का प्रवाह और गति,
कभी जीवन और मृत्यु बनते,
प्रवाह का सन्तुलन ही--
मानव को,मान-सम्मान देते,
और तो महानतम बनाते -- ।
शरीर और आत्मा --
आत्मा और प्राण-वायु ,
फेफड़े और ह्रदय की गति,
प्रवाह के मानक हैं होते---
जीवित और निर्जीव शरीर का,
फर्क है,यही तो,हैं बताते--।
सँसार में, सन्त-महात्मा और--
गुरूओं के उपदेश,ज्ञान व संवाद,
के सतत् प्रवाह ने ही--
समाज की सभ्यताओं,सँस्कृतियों को,
हममें,अब तक,जीवित रखा है--।
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