सुंदरगढ़, ओडिसा
विधा-दोहा छंद
विषय-जीवन
1 जीवन ये अनमोल है, रखो इसको बचाए।
करो निदान रोग का,कुछ भी कर उपाए।।
2 कल-कल करती नदी भी,बहती शोर मचाए।
देख धरा का हाल अब, अश्रु वो भी बहाए।।
3 हलचल है मची जग में,दिशा शून्य धाए।
संकट में हैं प्राण अब, पड़े मूर्छा खाये।।
4 दोष दे औरों को अब,खुद को ले बचाये।
तूफान घिर जाए जब,कश्ती को डुबोए।।
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