Monday, May 24, 2021

मोनालिसा बेहरा के दोहे- जीवन

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिसा
विधा-दोहा छंद
विषय-जीवन

1  जीवन ये अनमोल है, रखो इसको बचाए।
    करो निदान रोग का,कुछ भी कर उपाए।।

2  कल-कल करती नदी भी,बहती शोर मचाए।
     देख धरा का हाल अब, अश्रु वो भी बहाए।।

3  हलचल है मची जग में,दिशा शून्य धाए।
     संकट में हैं प्राण अब, पड़े मूर्छा खाये।।

4  दोष दे औरों को अब,खुद को ले बचाये।
     तूफान घिर जाए जब,कश्ती को डुबोए।।

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