जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
विषय-दिवास्वप्न
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-दिवास्वप्न
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चैतन्य आँखों से देखें गर हम ,दिवास्वप्न उस मंजिल का ,
तब हासिल होगा हमको , ख्वाहिश अपने अरमानों का।
कौन कहता है भला ! ख्वाब कभी पूरे नहीं होते !!!
सजग नयनों में हौसला भर कर चलें तो ,
हर पर्वत राई होता है ।
खुली आँख के हसीन सपनों से,
जिंदगी खुशनुमा हो जाती है,
सभी तलब पूरे होते हैं,
हर मुकाम हमें मिल जाते हैं।
।।इति।।
" गोमती सिंह "
कोरबा, छत्तीसगढ़
बहुत सुंदर कविता ।
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