स्थान- बनाई, तमनार जिला रायगढ़।
विधा- कविता (छंद-दोहा )
शीर्षक- "मानसून"
**********************
चुनरी बूंदे ओढ़ के, बादल आये पास ।
नाचे बादल झूमके, मौसम ऐसा खास।।
सारा आलम सूखता,धरती खोई आस।
मानसून चलते बने, पानी तरसे मास।।
मानव अब तो समझ जा, पौधे करते बात ।
मानसून जो बरसते , देते दुखको मात ।।
पौधे लागे सुख है, बात यह तू जान ।
उमंग भरभर नीव हो, ईश्वर जाये मान ।।
No comments:
Post a Comment