जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - दिवास्वप्न
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - दिवास्वप्न देखा करते हैं
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//दिवास्वप्न देखा करते हैं//
मन के लड्डू खानेवाले ,
ख्याली पुलाव बनानेवाले ,
नभ के तारे गिनने वाले ,
बकबक-झकझक करने वाले ,
दिवास्वप्न देखा करते हैं ।
बैठे - बैठे रोटी तोड़ते ,
बड़ी - बड़ी जो बातें करते ,
हवाई किला बनाते फिरते ,
कठिन परिश्रम से जो डरते ,
दिवास्वप्न देखा करते हैं ।
अकर्मण्य जो हैं निराश ,
मन मे मिथ्या कल्पित ख्वाब ,
करे असंभव अद्भुत बात ,
लेकिन कुछ नहीं आते हाथ ,
दिवास्वप्न देखा करते हैं ।
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