रचनाकार__ पद्मा साहू "पर्वणी"
खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
दोहा ___विधा
विषय_____ *मॉं*
ममता की मूरत तुझे, मॉं मैं करूँ प्रणाम ।
तेरे चरणों स्वर्ग है, सारे तीरथ धाम। ।१
सुखसागर की खान मॉं, मधुर गीत की तान ।
जननी कल्याणी जगत, तुझमें बसती जान।।२
मॉं के आँचल में हमें, मिलता प्रेम दुलार ।
मॉं मेरी प्यारी बड़ी, नयन नेह की धार।।३
हाथ उठे मॉं की सदा, देने को आशीष।
करने मातु प्रणाम यह, नित्य झुके है शीश।।४
बेटी मॉं की रूप है, रखो बात यह ध्यान।
सृष्टि चक्र चलता रहे, सुता बचाओ आन।।५
महिमा मातु अनंत है, कैसे करूँ बखान।
पाने आँचल मातु की, तरसे देव महान।।६
मॉं है जीवन दायनी, वंदन बारंबार।
करुणा अरु वात्सल्य की, बहती जिसमें धार।।७
उठकर नवल प्रभात में, गाती सुंदर गान।
लोरी बनकर रात में, गीत सुनाती तान।।८
मॉं तुमको मैं क्या लिखूँ, तेरे बिन मैं व्यर्थ।
लिखने तुझको तूलिका, रखती नहिँ साम्यर्थ।।९
मॉं जीवन आधार है, सभी करो सम्मान।
कहे सदा ही *पर्वणी* , मातु बढ़ाओ शान।।१०
पद्मा साहू *पर्वणी*
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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