संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय- माँ
दिनाँक-21.05.21
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माँ हूँ,जगती पर मेरा,
प्रभाव है समाया।
बच्चों पर मेरी ममता,
हर पल नजर आया।।
मुझे मातृत्व का
एहसास कराया ।
जीवन में संपूर्णता का
भान हो आया ।।
आ तुझे बाँहों में
भर कर नेह से भर दूँ ।
तेरे हर अरमानों पर
हर सुख वार दूँ ।।
जग की ऊँची-नीची
राहों में चलना सिखा दूँ ।
क्या होती है दुनियाँ ?
उस चलना सीखा दूँ ।।
हाथों में उठा तुझे
आसमां की सैर करा दूँ ।
तेरी किलकारी सुन
सब बैर भाव भूला दूँ ।।
तूने जन्म लेकर
मुझको है निहाल किया ।
तेरी तुतली बोली,घुटनों के बल
चलने ने मुझे खुशहाल किया ।।
तेरी मुस्कान मेरी जान है
जग को बदला दूँ ।
माँ जैसी जग में कोई नहीं
जग को समझा दूँ ।।
तू प्यारा,मेरी आँखों का
तारा,राज दुलारा है ।
इस जग में कोई नहीं
तुम्हीं मेरा सहारा है ।।
सदा खुश रहे,गगन चूमे,
आशीष हमारा है ।
जीवन पथ पर बढ़ता जाएं,
यह आस हमारा है ।।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
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