Friday, May 21, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- माँ

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ. ग.)
       विषय-    माँ
        दिनाँक-21.05.21
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माँ हूँ,जगती पर मेरा,
  प्रभाव है समाया।
 बच्चों पर मेरी ममता,
 हर पल नजर आया।।

मुझे मातृत्व का 
एहसास कराया ।
जीवन में संपूर्णता का 
भान हो आया ।।

आ तुझे बाँहों में 
भर कर नेह से भर दूँ ।
तेरे हर अरमानों पर 
हर सुख वार दूँ ।।

जग की ऊँची-नीची 
राहों में चलना सिखा दूँ ।
क्या होती है दुनियाँ ?
उस चलना सीखा दूँ ।।

हाथों में उठा तुझे 
आसमां की सैर करा दूँ ।
तेरी किलकारी सुन 
सब बैर भाव भूला दूँ ।।

तूने जन्म लेकर 
मुझको है निहाल किया ।
तेरी तुतली बोली,घुटनों के बल 
चलने ने मुझे खुशहाल किया ।।

तेरी मुस्कान मेरी जान है 
जग को बदला दूँ ।
माँ जैसी जग में कोई नहीं 
जग को समझा दूँ ।।

तू प्यारा,मेरी आँखों का 
तारा,राज दुलारा है ।
इस जग में कोई नहीं 
तुम्हीं मेरा सहारा है ।।

सदा खुश रहे,गगन चूमे, 
आशीष हमारा है ।
जीवन पथ पर बढ़ता जाएं,
यह आस हमारा है ।।

       नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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