जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - वंदना
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - सरस्वती वंदना
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// सरस्वती वंदना //
सरस्वती की करो वंदना ,
विद्या देने वाली है ।
अम्ब शारदा हंसवाहिनी ,
महिमा बड़ी निराली है ।।
शुभ्र वस्त्र धारण करती हैं ,
जगदव्यापिनी माता ।
वीणा पुस्तक माला कर में ,
देव मनुज गुण गाता ।।
मिटा मोह अज्ञान तिमिर को ,
करे परम उजियाली है ।
अम्ब शारदा.....।।१।।
ब्रम्ह ज्ञान सद्ज्ञान की देवी ,
कृपा तुम्हारी जो पाते ।
कालिदास सूर तुलसी जैसे ,
महाकवि बन जाते ।।
पंडित ज्ञानी भक्त सभी जन ,
पीते माँ की प्याली हैं ।
अम्ब शारदा.....।।२।।
हे वागीश्वरी ब्रम्हचारिणी ,
बुद्धि विवेक बढ़ाओ ।
मानवता का मुकुट बने हम ,
सोया भाग्य जगाओ ।।
ममता करुणा बिना तुम्हारी ,
जीवन सुखी डाली है ।
अम्ब शारदा.....।।३।।
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