Friday, May 21, 2021

द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- माँ

द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक:"माँ के आँचल की छाँव"
विधा-कविता (तुकांत)
         ***
कष्ट सहकर जीवन सँवारती,
सुख सारे ‌बच्चों पर है वारती।
देती अपने आँचल की छाँव,
निश्छल होकर माता निहारती।।

सौ तकलीफ़े खुद सह लेती,
चिरायु संतान रहे दुआ देती।
माँ का सुख बच्चों की खुशी
ममता बरसाती बलाएँ लेती।।

किस्मत में आँचल की छाँव,
जन्नत समझें पूजें इनके पाँव।
तीर्थधाम का‌ दर्शन है अधूरा,
सुखसागर है चरणों की ठाँव।।

जन्मभूमि की जननी सी माया,
सुखदायी इसकी शीतल छाया।
जग पालती आँचल की छाँव,
बराबर सभी पर इनका साया।।

तेरा रूप देवता सा धरती पर,
देती आँचल की छाँव आकर।
त्याग तपस्या की मूरत हो तुम,
देव भी तुष्टि पाते तुम्हें पाकर।।
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          पिन -493445
Email: dropdisahu75@gmail.com

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