Saturday, May 29, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- सन्नाटा

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-सन्नाटा
विधा-कविता (मुक्त छंद)

पसरा हुआ सन्नाटा कह रहा
अनकही कहानी|
कितना खौफनाक हवा  है,
जहरीला पानी||

शाख से टूट चुकी अनगिनत
कलियां बेचारी,
अधखिली ही तो थीं कैसी ये
उनकी लाचारी|

बेबसी थी रो भी न सके अपनों 
से बिछड़ कर,
कायनात ही सिहर उठी  मंजर
को देखकर|

आओ बची हुई धरती को हम  फिर संवारें|
मन के बुझे हुये चिराग को हम
अब जलायें||

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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