जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
शीर्षक - जहाँ की रिवाज़ें
विधा- गजल
दिनाँक - 07/04/2021
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कोई भगवान तो कोई खुदा बताते हैं,
अपने ही फायदे की सब कथा बताते हैं।
देखते कौन हैं अपने गिरेबान में भी,
सब के सब दूसरे को ही बुरा बताते हैं।
वो जहर ही उगलते हैं जुबान से अपनी,
और खुद को मगर देखो डरा बताते हैं।
लूटते हैं वे ही हिस्से सभी गरीबों के,
पीड़ितों संग खुद को जो खड़ा बताते हैं।
बेच खाए इधर वो सब कमाई पुरखों की,
जाने क्यों फिर तिजोरी को भरा बताते हैं।
न्याय की आस भी उनसे यहाँ करें कैसे,
पोजिशन देखकर जज जी सजा बताते हैं।
इस जहाँ की रिवाज़ें भी अजीब हैं कौशिक,
जख़्म देकर हिफ़ाजत की दवा बताते हैं।
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