जिला-रायपुर
विधा-कविता
विषय-माँ
यूँ ना करो कृतघ्नता,बड़ी मुश्किल से जिलाया होगा|
कुछ ना भी करे तब भी, तुम्हे दूध तो पिलाया होगा|
पूछ के देखना कभी, बचपन की यादों से,
खुद भूखी रहकर, तुम्हें कुछ तो खिलाया होगा|
अपने कृत्यों को याद करके, देखना कभी साफ मन से,
तुमने कितनी ही बार उनको, बेवजह तो रुलाया होगा|
जब कहीं शुकूँ ना मिला होगा दुनियाँ में,
उसने अपनी बांहों में भरके,वो शुकूँ तो दिलाया होगा|
जिंदगी की असफलताएं जब तोड़ देती हैं,
थके जिस्म को ,अमृत सा आब, उसने पिलाया तो होगा|
जब सारी दुनियाँ हिराकत से ,देखती होगी तुझे,
उन नजरों को गिराने माँ ने पत्थर तो उठाया होगा|
उसके जाने के बाद, दुनियाँ यूँ ही नहीं रोती,
माँ ,माँ है उसकी जैसी कोई और नहीं होती|
अमिताभ कुमार दीवान
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