विधा-चित्र पर कविता
शीर्षक:"चूल्हे का भोजन"
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मिट्टी के चूल्हे का भोजन मजेदार।
माँ चौके में बैठकर बनाती रसदार।।
मिट्टी की हांडी के भोजन का स्वाद।
चावल औंटा बनाए या हो पसौवादार।।
सब्जी को धीमा भुनना रस चपचपा।
बगल की सिगड़ी में कोयला रौबदार।।
कलौंजी में बनी दाल के क्या कहने।
सौंधी सी गंध आती घी की खुशबूदार।।
चूल्हे के पास बैठकर बनाती रसोइन।
मेहनत संग प्यार डाले राँधे मसालेदार।।
भोजन मिट्टी के चूल्हे पौष्टिक भरपूर,
भूलाए नहीं भूले वो रोटियाँ जालीदार।।
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