Wednesday, May 19, 2021

उर्मिला सिदार की रचना- इंसान

रचयिता-उर्मिला सिदार 
ग्राम-बुलाँकी ,रायगढ (छ. ग.) 
दिनांक -20/05/2021
दिन  -गुरूवार 
विधा -कविता
शीर्षक - "इंसान की करतूत"
*************************

        *इंसान की करतूत*

इंसान ने इंसान का ,
गला घोट डाला ।
सुविधा संग्रह के चक्कर में ,
अपनों को मार डाला ।

यह कैसे शिक्षा नीति है,
यह कैसे ज्ञान की प्रेरणा।
अपनों का पहचान नहीं है,
जी रहे हैं ,संवेदना ।

अपने पराए की काला दीवाल से,
तुम, कब तक निकल पाओगे।
नफरत की गर्त में डूब कर तुम,
कब तक जी पाओगे ।

कैसे मति है मानव की ,
पोषण ही स्वयं का भूल गये।
खुद का शोषण कर मानव ने ,
खुद का लुटेरा बन ये।

बेशुमार विलासिता से मानव,
मन तुम्हारा भरा नहीं ।
अपराध की प्रवृत्ति में डूबा ,
तुम स्वयं से क्यों डरा नहीं ।

 उम्र ढल रही है तुम्हारा ,
 तुम कब चलोगे प्रेम की राहें। 
 बिंदास जिंदगी जी लो तुम ,
 आगे जिंदगी मिले ना मिले।
*************************
 उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...