जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - माँ
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - " माँ तेरे बिन "
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डर लगता है माँ तेरे बिन,
पूरी ज़िन्दगी कैसे गुजारुंगी।
अपनी छोटी-छोटी गलतियों को,
माँ तेरे बिन कैसे मैं सुधारुँगी।।
फूल-सी अपनी बेटी को छोड़कर,
माँ तुम कहाँ चली गयी।
क्या होगा माँ मेरा तुम्हारे बिना,
इतनी बड़ी बात, माँ तुम क्यों भूल गयी।।
नहीं रह पाऊँगी माँ मैं तेरे बिन,
रो-रो के मैं मर जाऊँगी।
चली आ माँ तू मेरे पास,
नहीं तो मैं खुद तेरे पास चली आऊँगी।।
बिन तेरे माँ मुझे, खाना कौन खिलाएगा।
मेरी बिखरी बालों को, तेरे बिन कौन सुलझाएगा।
कौन करेगा मुझे प्यार इतना,
माँ रात को लोरी कौन सुनाएगा।।
परछाई थी तू माँ मेरी,
हर दुःख तुझे सुनाती थी।
कभी बहन तो कभी सहेली,
माँ तुझे मैं बनाती थी।।
छीन लिया भगवान तुने,
मेरे भगवान के साथ को।
लौटा दो मुझे मेरी अम्मा,
तेरे चरणों में रखी हूँ दोनों हाथ को।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
मां ❤️🙏
ReplyDeleteBahut Hi Gahri feelings with writed sad lines but very nice write
ReplyDeleteDada..Bhut sundar rachna👌👌👌
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