Monday, May 24, 2021

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" के दोहे - जीवन

रचनाकार -- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
जिला - बलौदाबाजार
विषय - जीवन
विधा - दोहा
★★★★★★★★★★★
               जीवन पर दोहे
★★★★★★★★★★★★★★★★
दुष्कर करता है जनम,जीवन का अभिशाप।
जीवन जीना प्रेम से,कभी  करो  मत  पाप।।

जीवन  है  आवागमन ,क्या  इसका  विश्वास।
फिर भी मानव अंत तक,कब छोड़ा है आस।।

जिसको करना है सखा,निज जीवन में शोध।
नहीं करे वह तो कभी , अपने मन में  क्रोध।।

नवल वर्ष यह हो  सखा , जीवन  में  सुखसार।
दया धरम सुचि भाव  से, सुरभित  हो संसार।।

सरल सहज व्यवहार है,जीवन का आधार।
श्रेष्ठ वही मानव यहाँ,जिसमें शुभ संस्कार।।
★★★★★★★★★★★★★★★★★
               
          डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
            छत्तीसगढ़(भारत)

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